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Sunday, February 13, 2011

वक़्त के हातो मजबूर ...


ज़िन्दगी वैसे ही एक पहेली है ...
जिसको सुलझाने में इंसान ....
वक़्त बे वक़्त कोई इम्तिहान...
देने में लगा रहता है ...
सिवाय हेरान और परेशान होने के
करे तो क्या करे ..

फिर उसमे आ जा के ...
रिश्तो के अनसुलझे  तार ...
जिनको सुलझाने  में वक़्त के हातो ....
मजबूर एक कठपुतली कि सी  ...
ज़िन्दगी गुजार रहा इंसा ...
सिवाय हेरान और परेशान होने के
करे तो क्या करे ..

ऐसे में गर इश्क हो जाये तो ....
बावरे मन को कोई क्या समझाए कि
ज़रूरी नहीं कि मन जो चाहेगा वो ...
उसको मिल ही जायेगा फिर ....
सिवाय हेरान और परेशान होने के
करे तो क्या करे ..

ज़िन्दगी न जाने क्या क्या दिखलायगी ...
तुम हम तो बस एक कठपुतली है  ...
जो वक़्त के हातो मजबूर है ...
सिवाय हेरान और परेशान होने के
करे तो क्या करे ..

श्रुति मेहेंदले 13th फेब्रुअरी  2011

Friday, November 6, 2009

शायद इसीको कहते है ज़िन्दगी ..


गुज़री है ये ज़िन्दगी तुम्हारी  कुछ ...
तनहा और खामोश सी ...
गुस्ताखी  माफ़ हो मेरी जो मैंने ...
इस खामोश और तनहा ज़िन्दगी में दस्तक दी ..
पर इसमें कुछ खुदा कि मर्ज़ी भी है शामिल ...
वर्ना तुम और हम यू ना मिलते ...
न जाने क्यों तुमसे मिल के भी ...
ज़िन्दगी में तुम हो कुछ जुदा-जुदा से ..
फिर भी आलम ये है कि....
तुम्हारे रंग में हम भी है रंग गये....
कहने को तो बहुत कुछ है पर कहे तो क्या कहे... 
तुमको खामोशी है पसंद तो फिर ...
हम भी तुम्हारी खामोशी में है कुछ खामोश से ...
कितना भी चाहे तुमसे मिलना ...
पर ये ज़िन्दगी कि राहे है कुछ जुदा-जुदा सी ....
फिर तुम से यू जुदा हम भी है कुछ तनहा तनहा ...
वक़्त ने ये कैसा खेल है खेला ...
पा के भी तुमको है ज़िन्दगी में कुछ दूरिया  ..
अब तो खुदा से सिर्फ ये है कहना ...
जब जुदा ही थी राहे तो क्यों था मिलाया ...
जाने क्यों अब तो खुदा के...
इस खेल कि आदत सी हो गयी है ...
और फिर सोचती हु शायद ...
वक़्त भी कभी तो करवट बदलेगा ....
शायद इन खामोश राहो पे तनहा चलते-चलते ...
फिर किसी अनजाने मोड़ पे तुमसे मुलाकात हो ...
इसी उम्मीद पे ज़िन्दगी को...
 खुशगवार है मने किया....
शायद इसीको कहते है ज़िन्दगी ... 



श्रुति मेहेंदले 5th नवम्बर  2009






Tuesday, November 3, 2009

बस ये मेरे अपने अहसास है ये जिसे जी रही हु ...

ज़िन्दगी के नित नए रूप ....
कुछ न कुछ हमको है सिखाती  ...


जब मैंने सोचा कि ज़िन्दगी में भला अब क्या बदलाव आयेगा ....
तो ज़िन्दगी का रुख ही बदल गया ...
प्यार के एक और पहलु से रूबरू होने का अहसास हुआ  ...
बेइन्तिहः किसी को चाहना और फिर इस चाहत के साथ जीना ....
बस ये मेरे अपने अहसास है जिसे जी रही हु ...


ज़िन्दगी के नित नए रूप ....
कुछ न कुछ हमको है सिखाती  ..


सोच में हु कि क्या नाम दू मै इस रिश्ते को ....
क्योंकि ज़माना ऐसे बेनाम रिश्ते नहीं समझता...
लकिन ज़िन्दगी मे कुछ रिश्ते ऐसे भी होते है .....
जिनका कोई नाम नहीं फिर भी दिल के करीब होते है ...
बस ये मेरे अपने अहसास है जिसे जी रही हु ..


ज़िन्दगी के नित नए रूप ....
कुछ न कुछ हमको है सिखाती  ...


भाला किसी को क्या समझाऊ ये रिश्ता ....
ये मेरे अपने है मुझे किसी को समझाने की...
या किसी की अनुमति कि आवशकता नहीं ....
और जाने क्यों इस बात में मुझे एक सुकून सा है ...
बस ये मेरे अपने अहसास है जिसे जी रही हु ....


ज़िन्दगी के नित नए रूप ....
कुछ न कुछ हमको है सिखाती...


ऐसा नहीं की ज़िन्दगी से शिकायत नहीं ....
अपनेआप से ही जानने की कोशिस में निराश से मुलाकात होती है ...
जानती हु की खुदा भी मेरा इम्तिहान जो ले रहा है ...
सोचा एक इम्तिहान ये भी सही एक नया तजुर्बा ये भी सही ...
बस ये मेरे अपने अहसास है जिसे जी रही हु ...


ज़िन्दगी के नित नए रूप ....
कुछ न कुछ हमको है सिखाती....


ज़िन्दगी के दोराहे से अकेले गुज़र रही हु....
फिर भी एक सुकून है जानती हु कि जो फे़सले है किये...
अपनों से कुछ दुरिया है निभानी फिर भी दिल में फासले नहीं...
दिल कि दुविधामंस्थिति में भी खुश हु ...
बस ये मेरे अपने अहसास है जिसे जी रही हु ....


इसलिए "इस वक़्त को" " इन पालो को" बस जीना चाहती हु...




श्रुति मेहेंदले 20th ओक्टुबर 2009


Monday, October 19, 2009

आज कल मै अपनेआप से बात कर लती हु....



आज कल मै अपनेआप से बात कर लेती हू .....


जाने क्यों ज़िन्दगी जैसे अनकहे सवालो कि पहेली सी है....
ज़िन्दगी कि इन्ही पहेली को सुल्ज़ने का प्रयास है मेरा ...
जिसे माना है आपना उसे पा के भी ना आपना पाना.....
ये मेरी परिस्थिति खुदही मेरे लिए एक सावल है ...
जिसका जवाब मै रोज़ अपनेआप से तलाशती हू... 
आज कल मै अपनेआप से बात कर लेती हू .....


ये जो ज़िन्दगी के ये अनसुलझे सावाल है .....
ज़िन्दगी को एक नया मोडे दे रही है ...
इसको कभी तो मै बड़ी सरलता से आपना लेती हू  ...
जानते हुए कि प्यार सिर्फ पाने का नाम ही नही ...
पर एक अहसास है जिसे हम महसूस करते है .....
और जो हम चाहते है वो ज़रूरी नहीं कि पूरी हो जाये ...


आज कल मै अपनेआप से बात कर लेती हू .....


पर कभी तो ये परिस्थितिया इतना विवश कर जाती है  ...
कि दिल मजबूर हो रो उठता है आपनी ही विवशता पर .....
ना जाने क्यों वक़्त भी नित नए इम्तिहान देने पर मजबूर है करे ...
किसी को क्या बतलाये अपने मन कि व्यथा ...
जब खुद ही न समझ सकी हु कि " मै ही क्यों "...


आज कल मै अपनेआप से बात कर लेती हु..........


खुदा से जो शिकायत है वो अपनेआप से कह देती हू  ....
ये सोच के कि मेरे अंदर का खुदा तो मेरी मदद जरूर करेगा ....
कम से कम इस विवशता को सहने कि क्षमता तो देगा ...
ऐ खुदा कुछ तो राह दिखा इस विवशता से ....


आज कल मै अपनेआप से बात कर लेती हू ..........


श्रुति मेहेंदले 16th ओक्टुबर 2009

Monday, October 12, 2009

ज़िन्दगी के रंग




ज़िन्दगी कभी धुप तो कभी चाव सी है ...
कभी रात तो कभी दिन जैसी है ज़िन्दगी ....


ज़िन्दगी मे कभी अँधेरा है तो कभी उजाला सा लगे ...
कभी  उतार तो कभी चडाव है ज़िन्दगी में


ज़िन्दगी में कभी सुख है तो कभी दुःख है…..
कभी किसी का आना है तो कभी किसी का जाना है ज़िन्दगी में……


ज़िन्दगी में कभी खोना है तो कभी पाना है….
कभी ज़िन्दगी है तो कभी मौत है ज़िन्दगी में……..



श्रुति  मेहेंदले 12th ओक्टुबर 2009

Sunday, October 11, 2009

सफ़र हर पल है बदल रहा ज़िन्दगी का..



सफ़र हर पल है बदल रहा ज़िन्दगी का...
है उस सफ़र पे निकल पड़े ...
जिसकी मंजिल का पता नहीं ....
जाने कब वक़्त करवट बदल ले ....
इसी ख्याल से जो ना सोचा था...
वो भी कर गुज़रे है हम इस मुकाम पे ....

सफ़र हर पल है बदल रहा ज़िन्दगी का...
चाहो ना चाहो फिर भी ज़िन्दगी में ....
कभी ख़ुशी है तो कभी गम ....
कुछ लम्हों कि ख़ुशी जीने के लिए ही सही ...
ज़िन्दगी को खुशगवार है हमने किया ....
अब चाहे सामने गम ही क्यों ना हो ....
उसे भी जी लेगे ख़ुशी ख़ुशी ...

श्रुति मेहेंदले  10th ओक्टुबर 2009

ज़िन्दगी के कुछ पल जो सिर्फ मेरे है ..


ज़िन्दगी के कुछ पल जो सिर्फ मेरे है ....
जो कि मेरे दिल के करीब है ...
कुछ बाते है तो कुछ लम्हे है ...
जो कि मन के आईने में साफ ज़लकते है...

बाते जो मन को छु गई ...
लम्हे जो दिल में समां गए ...
जब कभी अपनेआप से सामना होता है ...
पानी के बुल बुलो कि तरह ...
मन के गहराई से उभर आते है ....

कितना भी चाहो जब भी ये लम्हे दस्तक देते है....
चहरे पर इक मीठी सी मुस्कान छा जाती है....
मन उन यादो में जैसे खो जाता है ...
  
कहते है कि बीते हुए लुम्हे वापस नहीं आते  ..
लकिन मेरे लिए ये बीते लम्हे रोज़ दस्तक देते है ...
और ज़िन्दगी को जीने कि उमंग देते है ....

ज़िन्दगी के कुछ पल जो सिर्फ मेरे है .....

श्रुति मेहेंदले 11th ओक्टुबर 2009

Welcome to Sentiments

When we connect to any one it is the Sentiments we have with each other that is reflected