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Monday, September 17, 2012
Wednesday, May 19, 2010
तुमने ये कैसे कह दिया की ....
तुमने ये कैसे कह दिया की...
क्या तुम सच में मेरी जान हो ...
ये सवाल शायद तुम अपनाप से पूछते ...
तो भी जवाब मिल जाता ...
ये बात अलग है कि तुम ...
इस बात को मानना नहीं चाहते ...
तुम अपनेआप से ही भाग रहें हो ...
तो मेरे वजूद पे तो सवाल आ ही जाता है ...
तुमने न जाने क्यों ...
अपनी सोच को इस तहर ढाल लिया है कि ..
जो सच है उसको भी ....
पहचाने से कतराते नहीं ...
माना कि ज़िन्दगी कुछ इम्तिहान ले रही है ...
इसका मतलब ये नहीं ....
जो अपने है उनको भी ....
ज़िन्दगी मैं तुम पराया कर दो ...
ज़िन्दगी मैं ...
मुश्किल से अपने मिलते है ....
कोशिश कर उनको तो संजो के रखो ..
ये न हो जब वक़्त आये ....
अपनेआप से सामना करने का ...
तो आख़ न मिला सको ...
अपनेआप से ...
श्रुति मेहेंदले 19th में 2010
Sunday, January 17, 2010
दे रही है दस्तक खुशिया ...
क्यों देता है सुकून ..
कही किसी कोने में...
इस मन के ..
इस मन के ..
अब भी है यकीन ...
आएगे वो कदम लौट के ...
खुले है अब भी...
मन के द्वार ...
खुले है अब भी...
मन के द्वार ...
दे रही है दस्तक खुशिया ....
सुन के उन कदमो कि आहट ...
श्रुति मेहेंदले 14th जनुअरी 2010
श्रुति मेहेंदले 14th जनुअरी 2010
Friday, January 15, 2010
यकी है मुझे....
कभी तो खुदा से तो कभी जान तुम से ...
कभी तो है मिली ख़ुशी तो कभी है मिले गम ..
इसी बात को लेके कभी सुकू है तो कभी शिकायत ...
इस कशमकश में हु कि ....
क्या तुमसे कहू तो क्या खुदा से ...
तुमको पा कर भी है...
तुमसे दूरिया...
वक़्त का है ये कैसा खेल ...
जाने क्यों फिर भी ....
यकी है मुझे....
कुछ अपने खुदा पे ...
तो कुछ अपने प्यार पे ....
श्रुति मेहेंदले 15th जनुअरी 2010
Sunday, November 8, 2009
काश गुज़ारा होता कुछ वक़्त अपनों के साथ भी ...
जिंदगी कि रफ़्तार में न जाने क्यों गुम से हो गये ...
और फिर चाह के भी मिल न सकी अपनों से ...
वक़्त ने यू मौत का तमाचा है मारा ...
की ज़िन्दगी भर अफ़सोस रहेगा कि ...
अपनों के साथ वक़्त न बिता सकी ...
जब तक इंसा जिंदा है मिलने की उम्मीद तो होती है ....
जब छोड़ गये ये जहा तो उम्मीद का सहारा भी है छूट जाता ....
किसी के जाने के बाद है होता एहसास ...
की काश गुज़ारा होता कुछ वक़्त अपनों के साथ भी ...
अब तो दिल की बात दिल में ही रह गई ....
जाने वाले चले गये और हम वक़्त के ...
हातो मजबूर सिर्फ अफ़सोस करते रह गये ...
और फिर चाह के भी मिल न सकी अपनों से ...
वक़्त ने यू मौत का तमाचा है मारा ...
की ज़िन्दगी भर अफ़सोस रहेगा कि ...
अपनों के साथ वक़्त न बिता सकी ...
जब तक इंसा जिंदा है मिलने की उम्मीद तो होती है ....
जब छोड़ गये ये जहा तो उम्मीद का सहारा भी है छूट जाता ....
किसी के जाने के बाद है होता एहसास ...
की काश गुज़ारा होता कुछ वक़्त अपनों के साथ भी ...
अब तो दिल की बात दिल में ही रह गई ....
जाने वाले चले गये और हम वक़्त के ...
हातो मजबूर सिर्फ अफ़सोस करते रह गये ...
श्रुति मेहेंदले 8th नवम्बर 2009
this is for You Antaa kaka.....
my uncle who passed away on 7th Nov 2009
Wednesday, November 4, 2009
ये रिश्तो कि अनसुलझी तस्वीर..... ..
ये रिश्तो कि अनसुलझी तस्वीर.....
खुदा ही जाने कि रिश्तो कि .....
खुदा ही जाने कि रिश्तो कि .....
नींव कब और कहा रख लेता है इंसा ...
और न जाने कब और कैसे .....
पक्की ईमारत के से रिश्ते ....
जाने किस कारण खँडहर में तब्दील हो जाते है ...
जो रिश्ते लगे कि आज है बने...
न जाने वो कितने जन्मो से चले आ रहे है ...
कभी कभी खून के रिश्ते युही अचानक ...
पराये से हो जाते है ....
खुदा महफूज़ रखे इन रिश्तो को ...
क्योंकि ये रिश्ते ही है जो...
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर हमे...
चलते रहने कि मजबूती देते है ....
श्रुति मेहेंदले 4th नवम्बर 2009
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