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Monday, September 17, 2012

यही दुआ हर दुआ में मांगती हु ...



 तुमसे जब मिले थे 
तो सोचा ना था 
की कोई अनजान रिश्ता 
दिल से बन जाएगा 

वक़्त के साथ 
रिश्ता बढ़ता और गहरा भी हुआ 
मैं जानती हु 
ये रूह का ही 
रिश्ता है 


ज़िन्दगी के  इतने उतार चढ़ाव 
के बावजूद  
दिल अब भी तेरी 
ख़ुशी चाहे 

तू सलामत रहे 
यही दुआ हर 
दुआ में मांगती हु 


श्रुति मेहेंदले 17th सितम्बर 2012


Friday, November 26, 2010

बस यही एक तमन्ना है बाकी ...



जब भी तेरा नाम होटो पे आया ....
दिल से सिर्फ दुआ है निकली ...
तुम खुश रहो बस यही है तमन्ना दिल कि ....
तुम्हारी ख़ुशी में है मैने ढूंढे इस तनहा दिल का सुकून ...
वैसे याद तो उनको करते है ...
जिनको हम भुला देते है ...
जाने क्यों चाह कर भी ...
तुमको भुला न सकी ...
आज भी दिल के एक हिस्से में ..
बस तुम ही हो बसे ...
तुमसे है शिकवे कितने 
फिर भी रोज़ ...
तुमको है सजदा करते ...
दर्द तुमने इस दिल को है कितने दिए ...
फिर भी दर्द में मुस्कुराने कि सजा ...
अपने आप को है दी ..
तुमने तो कभी मुड़ के देखा भी नहीं ...
नहीं तो पढ़ लेते इन आखों में कितना है प्यार भरा ...
मैंने तो सिर्फ तुमसे प्यार किया  ...
मैंने खुदा से न चाँद माँगा ...
ना मांगी इस जहा कि दौलत ...
मांगी थी तो सिर्फ...
तुमसे जुड़े रहने कि ख़ुशी ...
गम इस बात का नहीं कि राहें है जुदा जुदा ...
गम इस बात का है कि ...
अब है दिलो में फासले कुछ बढे बढे ...
मैंने तो हर बार चाहा कि ये फासले हो कम ...
 या खुदा गर एक दुआ हो मेरी भी कबूल ..
तो मिटा दे ये दिलो के फासले .. 
बस यही एक तमन्ना है बाकी ... 

श्रुति  मेहेंदले  26th नवम्बर 2010

Wednesday, May 19, 2010

ये ज़रुरी तो नहीं.....







तुमसे जो ये रूह का रिश्ता है.....
उसे कोइ नाम दू......
ये ज़रुरी तो नहीं...

तुम से है महोबत्त....
इसे दुनिया को दिखाऊ....
ये ज़रुरी तो नहीं...



मेरे मन के आइने मे....
तुम्हरी तस्वीर बिल कुल साफ़ है....
किसी को दीखाऊ ....
ये ज़रूरी तो नहीं....

मेरा दिल क्या चाहे ....
तुम ये जान कर भी दीखाओ.....
ये ज़रुरी तो नहीं....

लेकिन इतना जरूर जानती हूँ  ...
कि तुम अनजान नहीं हो  ...
इस रूह के रिश्ती से ...

बस इसी बात का सुकून है ....
किसी को बताऊ ...
ये ज़रूरी तो नहीं ...


श्रुति मेहेंदले 19th  में 2010

तेरी चाहत में ....



ज़िन्दगी  में  तुम  आये .....
तो  तुमसे  है  चाहत ...
जाने  कबसे  है  ...
ये  चाहत  के  सिलसिले ...
मुक्कद्दर  को  न  था  ये  मंज़ूर ..
या  फिर  तुमको  
ये  नहीं  जान  पाई ...
लकिन  फिर  भी ...
ज़िन्दगी  गुज़र  रही  है ...
तेरी  चाहत  में   ....
अब  आलम  ये  है  कि .....
जी  रहें  है ...
तुमको  ना चाहने  कि  जुस्तजू  में ...
तुम  क्यों  हो  ख़फा ज़िन्दगी  से  
ये  तो  मैं  नहीं  जान  पाई  ...
पर  इतना  जानती  हु  कि ......
तुम  हो  मेरे  ही .....
जाने  कितने  जनमों से ...
खुदा  ही  जाने ..
फिर  क्यों  है    ...
ये  दूरिया और  तुम ...
कुछ अनजाने  से .... 

श्रुति मेहेंदले 19th  मे 2010

Saturday, March 20, 2010

ये खुदा कि इनायत है .....

ज़िन्दगी के सफ़र में...
इत्तफाकन तुमसे मिलना ....
ये खुदा कि इनायत है ..
इसे दुआ समज कबूल है मैने किया ...
रोज़ सजदा है करते...
खुदा को ...
इस इनायत के चलते ...
गम नहीं की....
 कुछ दूरिय है नसीब में पर...

ये फासले क्यों है दरमीया हमारे ...
हर लम्हा फासले का ...
ख्याल रखना ..
इतना न बढ़ जाए ..
की हम तुम ..
फिर से अजनबी न बन जाए 




श्रुति मेहेंदले 19th मार्च 2010 




Monday, February 15, 2010

रूह का रिश्ता......


ज़िन्दगी में तुम ....
युही कभी कभी ....
दस्तक दे दिया करो ....
कुछ अनजानी सी ख़ुशी  ...
जुडी है तुमसे ...
जो रूह तक को ...
सुकून दे जाती है  ...
ये मै भी न जान सकी क्यों ...
लकिन इतना यकी है ...
कि तुम से एक अजीब सा रिश्ता है...
जो हमारी रूह को है जोड़ता ...

श्रुति मेहेंदले 14th फरवरी 2010

Friday, February 12, 2010

कुछ लम्हे कि जुस्तजू में ....




दिल मे है दर्द का गुबार...
 होटो पे हसी ...
माना की ज़िंदगी की राहे है जुदा ...
पर रुह ने तो रुह को है पेह्चाना.... 
तभी तो एक चाहत के एहसास ने पनाह ली... 
हम तो तभी से जी रहे है तुम्हारे लिए ..
हमने तो चाहा हर लाम्हा कर दे तुम्हरे नाम...
तुम इस बात से अनजान नहीं ....
वो भी वक़्त था ...
जब तुम्हारा हर मुमकिन लम्हा था ...
हम दोनों का ...
न जाने क्या बात हुई की तुम अब....
कुछ लम्हा भी नहीं कर सकते...
हम दोनों के नाम ..
जानती हु की हर वक़्त एक सा नहीं होता ...
हम मिल के भी...
मिल न सके इस बात का गम नहीं...
गम इस बात का है की...
तुम रूह की तड़प को जानते हुए भी...
अनजाने हो ... . 
वफ़ा की बात तो छोडो...
हम तो सदियो से कर रहे इंतज़ार...
अब तो आस सिर्फ खुदा तुज़ः से ही है...
कुछ इनायत हमारी इन रुहों पर भी कर दो .. 


श्रुति मेहेंदले 12th फरवरी 2010

Friday, February 5, 2010

फिर एक और ज़िन्दगी तनहा गुज़ारने को .....

कैसे....
उन लफ्जों को....
बया करू .... 
कि तुमतक.....
ये दिल कि बात ....
पहुँच सके .... 
तुम अपनेआप में....
इतने सिमट गये कि .....
चाह कर भी तुम तक.... 
मेरे दिल कि आवाज़ ....
नहीं पहुँचती...  
कितनी शिदत से...
है तुमको चाहते .... 
कि अपनेआप को....
मिटा कर भी ...
रखा है....
जिंदा खुदही को ....
सिर्फ इसलिये की .....
एक वादा.....
तुमसे भी किया था कि ...
चाहे कितना भी....
दर्द समेटना पड़े....
तुम्हारे....
इश्क में ..... 
उफ़ तक न करेगे .....
अब तो सिर्फ ...
एक इनायत ...
इस तनहा रूह पे कर ए खुदा... 
कि तुमसे फिर एक मुलाकात हो ....
और झाक सकू.....
उन आखों में ....
फिर एक बार ....
और समेट लू कुछ यादे ...
इस दिल के कोने में ...
फिर एक और ज़िन्दगी...
तनहा गुज़ारने को ....


श्रुति मेहेंदले 5th फ़रवरी 2010


Friday, January 15, 2010

तुमसे है मेरा रूह का रिश्ता ....



तुमसे है मेरा रूह का रिश्ता ....
तुम इस बात से इतफ्फक ना भी रखो ...
तो भी इस बात को झुटला नहीं सकते ...

रूह ने रूह को है पहचाना ...
तुमको पाना ये खवहिश नहीं मेरी  ...
बस तुमसे एक रूहानी रिश्ता है ..
जाने क्यों इन दूरियों ने भी ...
लेना चाहा इम्तिहान फिर भी ...
बस  एक कशिश सी है तुमसे  ....
जाने कबसे है ये सिलसिले चाहत के  ...
जो न ले मिटने का नाम ...
अब तो बस यही है दुआ ...
बना राहे ये खूबसूरत रूह का रिश्ता ...
फिर ना टूट ये डोर दिलो कि  ...
चाहे हो दूरिया दरमिया हमारे  ..
पर मन में न हो फासले हमारे   ....



श्रुति मेहेंदले  14th जनुअरी 2010

Welcome to Sentiments

When we connect to any one it is the Sentiments we have with each other that is reflected