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Friday, February 12, 2010

आपको देखे अर्सा बीत गये....



आपको देखे अर्सा बीत गये....
आस का दीपक टिमटिमा रहा....
इस जुस्तजु मे कि ....
जाने कब होगा दीदार .....
हमे तो अब भी उस दिन.....
उस पल का है इंतज़ार.....
जब तुम से फ़िर होगी मुलाकत....
हकीकत तो ये है कि ....
हम तो आप कि खुशी मे है खुश....
लेकिन गम तो इस बात का है....
तुम मेरे दिल कि ....
छोटी छोटी खुशीयो को ....
नहीं समझ सके ...
मुझें कल भी इंतज़ार था....
आज भी है ...
मै ज़िंदगी के उसी मुका पे खडी हूँ....
जहा से तुम...

 अकेले ही सफ़र पे निकल पड़े
और मै चाह कर भी...

 तुम तक नहीं पहुँच पा रही ....


श्रुति  मेहेंदले 12th फरवरी 2010 

Tuesday, November 3, 2009

कैसे कहू.....

कैसे कहू कि खुदा कि रहमत है .... 
जो मरी तुमसे मुलाकात हुई ...


कैसे कहू कि ये इत्तफाक एक दुआ है ...
जो कबूल की हो खुदा ने ...  


कैसे कहू कि तेरा मेरा यू मिलना और...
फिर ये अपनापन का अहसास .. 


कैसे कहू कि तुमको बेइंतिहा चाहना ... 
ये वो जज़्बात है जो मेरे बस में नहीं ... 


कैसे कहू कि ये बात भी उतनी ही सच है कि ... 
इस जज़्बात से सब वाकिफ नहीं ....


कैसे कहू कि मै खुशनसीब हु जो तुमने...
इन एहसासों से रूबरू है मुझको किया .....


श्रुति मेहेंदले 27th अक्टूबर 2009


Welcome to Sentiments

When we connect to any one it is the Sentiments we have with each other that is reflected