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Saturday, January 23, 2010

इत्तफाक कि बात है ....





ज़िन्दगी  के काँरवा में  कई  मोड़  आये .....
और  हम  उनसे  गुज़रते  गये .....
इत्तफाक   कि  बात  है .....
जिस  मोड़  पे  तुमसे  रूबरू  हुए ....
हमारे  कदम  वही  थम  गये ....
जैसे  मुसाफिर  को  अपनी  मंजिल  मिल  गई ...


श्रुति मेहेंदले 21st जनुअरी 2010

2 comments:

के सी said...

इतने सुंदर इत्तेफाक कम ही होते हैं. आपने खूबसूरत लफ़्ज़ों से उसे और हसीन बना दिया है.

monali said...

All poems are truelly beautiful....

Welcome to Sentiments

When we connect to any one it is the Sentiments we have with each other that is reflected